ब्रेन स्ट्रोक की प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के उपाय जानिए
शरीर के आधे हिस्से में कमजोरी. आधे चेहरे, एक हाथ या पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना. आवाज में तुतलाहट या बंद होना. चाल में लडख़ड़ाहट. हाथ-पैर का संतुलन बिगडऩा. बेहोशी आना. सिर में तेजदर्द के साथ उल्टी व चक्कर आना. भ्रम की स्थिति होना. आंख से धुंधला या डबल दिखना. निगलने में परेशानी.
फौरन मिले इलाज
उपरोक्त लक्षण 24 घंटे से अधिक समय तक बने रहें तो ब्रेन स्ट्रोक होने कि सम्भावना है . मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए जहां फौरन सीटी स्कैन व ब्लड टैस्ट की व्यवस्था हो . अगर किसी आदमी में स्ट्रोक के लक्षण दिखते हैं व स्वत: ही (24 घंटे के अंदर) अच्छा भी हो जाते हैं तो इसे ट्रांजियंट इस्कमिक स्ट्रोक (टीआईए) कहते हैं . यह ब्रेन स्ट्रोक की चेतावनी है . ऐसे में तुरंत विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए .
उपरोक्त लक्षण 24 घंटे से अधिक समय तक बने रहें तो ब्रेन स्ट्रोक होने कि सम्भावना है . मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए जहां फौरन सीटी स्कैन व ब्लड टैस्ट की व्यवस्था हो . अगर किसी आदमी में स्ट्रोक के लक्षण दिखते हैं व स्वत: ही (24 घंटे के अंदर) अच्छा भी हो जाते हैं तो इसे ट्रांजियंट इस्कमिक स्ट्रोक (टीआईए) कहते हैं . यह ब्रेन स्ट्रोक की चेतावनी है . ऐसे में तुरंत विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए .
शुरू के 3 घंटे महत्त्वपूर्ण
ब्रेन स्ट्रोक में प्रारम्भ के 3 घंटे अहम होते हैं . इस दौरान मरीज को ठीक उपचार मिलने पर रिकवरी जल्दी होती है . उपचार में देरी से जान जाने का भी खतरा रहता है . इसका उपचार मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है l
ब्रेन स्ट्रोक में प्रारम्भ के 3 घंटे अहम होते हैं . इस दौरान मरीज को ठीक उपचार मिलने पर रिकवरी जल्दी होती है . उपचार में देरी से जान जाने का भी खतरा रहता है . इसका उपचार मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है l
प्रमुख जांचें
ब्रेन स्ट्रोक की प्रारंभिक जांचों में कुछ ब्लड टैस्ट व सीटी स्कैन किए जाते हैं . आवश्यकता पडऩे पर चिकित्सक एमआरआई, एंजियोग्राफी व २डी ईको भी कराते हैं .
इनसे है खतरा
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की समस्या, मोटापा, ज्यादा तनाव, हार्ट अटैक, कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होना, रक्त में होमोसिस्टीन (एक प्रकार का प्रोटीन) अधिक होना, खून की कमी (एनीमिया), धूम्रपान की आदत, शराब और तंबाकू की लत, स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री, कुछ हार्मोनल दवाओं का अधिक प्रयोग व ज्यादा जंकफूड खाने वाले लोगों को ब्रेन स्ट्रोक की संभावना रहती है .
ब्रेन स्ट्रोक की प्रारंभिक जांचों में कुछ ब्लड टैस्ट व सीटी स्कैन किए जाते हैं . आवश्यकता पडऩे पर चिकित्सक एमआरआई, एंजियोग्राफी व २डी ईको भी कराते हैं .
इनसे है खतरा
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की समस्या, मोटापा, ज्यादा तनाव, हार्ट अटैक, कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होना, रक्त में होमोसिस्टीन (एक प्रकार का प्रोटीन) अधिक होना, खून की कमी (एनीमिया), धूम्रपान की आदत, शराब और तंबाकू की लत, स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री, कुछ हार्मोनल दवाओं का अधिक प्रयोग व ज्यादा जंकफूड खाने वाले लोगों को ब्रेन स्ट्रोक की संभावना रहती है .
सावधानी ही बचाव
हाई रिस्क फैक्टर को पहचानें व उससे बचें . अगर हार्ट, बीपी व शुगर के मरीज हैं तो इसे नियंत्रण में रखें और नियमित दवाइयां लें . शराब, तंबाकू व धूम्रपान से दूरी बनाएं . वजन नियंत्रित रखें . अभ्यास व योग करें . शरीर में पानी की कमी न होने दें . जंकफूड से परहेज करें .
हाई रिस्क फैक्टर को पहचानें व उससे बचें . अगर हार्ट, बीपी व शुगर के मरीज हैं तो इसे नियंत्रण में रखें और नियमित दवाइयां लें . शराब, तंबाकू व धूम्रपान से दूरी बनाएं . वजन नियंत्रित रखें . अभ्यास व योग करें . शरीर में पानी की कमी न होने दें . जंकफूड से परहेज करें .
यहां उपचार है उपलब्ध
जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी में सीएन (कार्डियो-न्यूरो) सेंटर है . जहां हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को 24 घंटे उपचार मिलता है . अगर किसी मरीज को ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण दिखते हैं तो तत्काल सीएन सेंटर में दिखाएं . यहां 24 घंटे एक न्यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध रहते हैं . यहां डीएसए जाँच व मस्तिष्क की एंजियोप्लास्टी समेत आवश्यक सुविधाएं भी उपस्थित हैं .
जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी में सीएन (कार्डियो-न्यूरो) सेंटर है . जहां हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को 24 घंटे उपचार मिलता है . अगर किसी मरीज को ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण दिखते हैं तो तत्काल सीएन सेंटर में दिखाएं . यहां 24 घंटे एक न्यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध रहते हैं . यहां डीएसए जाँच व मस्तिष्क की एंजियोप्लास्टी समेत आवश्यक सुविधाएं भी उपस्थित हैं .
