जिन लोगों के हाथ-पैर झुनझुनाहट के कारण सुन्न हो जाते हैं वे इस खबर को जरूर पढ़ें नहीं तो.....
कमर से संबंधित नसों में से अगर किसी एक में भी सूजन आ जाए तो पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है, जिसे गृध्रसी या सायटिका (Sciatica) कहा जाता है। यह तंत्रिकाशूल (Neuralgia) का एक प्रकार है, जो बड़ी गृघ्रसी तंत्रिका (sciatic nerve) में सर्दी लगने से या अधिक चलने से अथवा मलावरोध और गर्भ, अर्बुद (Tumour) तथा मेरुदंड (spine) की विकृतियाँ, इनमें से किसी का दबाव तंत्रिका या तंत्रिकामूलों पर पड़ने से उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह तंत्रिकाशोथ (Neuritis) से भी होता है|
पीड़ा नितंबसंधि (Hip joint) के पीछे प्रारंभ होकर, धीरे धीरे तीव्र होती हुई, तंत्रिकामार्ग से अँगूठे तक फैलती है। घुटने और टखने के पीछे पीड़ा अधिक रहती है। पीड़ा के अतिरिक्त पैर में शून्यता (numbness) भी होती है। तीव्र रोग में असह्य पीड़ा से रोगी बिस्तरे पर पड़ा रहता है। पुराने (chronic) रोग में पैर में क्षीणता और सिकुड़न उत्पन्न होती है। रोग प्राय: एक ओर तथा दुश्चिकित्स्य होता है। उपचार के लिए सर्वप्रथम रोग के कारण का निश्चय करना आवश्यक है। नियतकालिक (periodic) रोग में आवेग के २-३ घंटे पूर्व क्विनीन देने से लाभ होता है। लगाने के लिए ए. बी. सी. लिनिमेंट तथा खाने के लिए फिनैसिटीन ऐंटीपायरीन दिया जाए। बिजली, तंत्रिका में ऐल्कोहल की सुई तथा तंत्रिकाकर्षण (stretching) से इस रोग में लाभ होता है। परंतु तंत्रिकाकर्षण अन्य उपाय बेकार होने पर ही किया जाना चाहिए।कई लोगों को हाथों और पैरों में झुनझुनाहट होती है साथ ही उनके हाथ पैर सुन्न भी हो जाते हैं। बता दें कि यह झनझनाहट होकर सुन्न होंने वाली बीमारी बैहद खतरनाक है। इसे बीमारी को कभी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। नहीं तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जब भी आपको इस तरह की परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
दोस्तों यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है लेकिन इसकी वजह से कई सारी परेशानिया हो सकती है।पीड़ा नितंबसंधि (Hip joint) के पीछे प्रारंभ होकर, धीरे धीरे तीव्र होती हुई, तंत्रिकामार्ग से अँगूठे तक फैलती है। घुटने और टखने के पीछे पीड़ा अधिक रहती है। पीड़ा के अतिरिक्त पैर में शून्यता (numbness) भी होती है। तीव्र रोग में असह्य पीड़ा से रोगी बिस्तरे पर पड़ा रहता है। पुराने (chronic) रोग में पैर में क्षीणता और सिकुड़न उत्पन्न होती है। रोग प्राय: एक ओर तथा दुश्चिकित्स्य होता है। उपचार के लिए सर्वप्रथम रोग के कारण का निश्चय करना आवश्यक है। नियतकालिक (periodic) रोग में आवेग के २-३ घंटे पूर्व क्विनीन देने से लाभ होता है। लगाने के लिए ए. बी. सी. लिनिमेंट तथा खाने के लिए फिनैसिटीन ऐंटीपायरीन दिया जाए। बिजली, तंत्रिका में ऐल्कोहल की सुई तथा तंत्रिकाकर्षण (stretching) से इस रोग में लाभ होता है। परंतु तंत्रिकाकर्षण अन्य उपाय बेकार होने पर ही किया जाना चाहिए।कई लोगों को हाथों और पैरों में झुनझुनाहट होती है साथ ही उनके हाथ पैर सुन्न भी हो जाते हैं। बता दें कि यह झनझनाहट होकर सुन्न होंने वाली बीमारी बैहद खतरनाक है। इसे बीमारी को कभी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। नहीं तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जब भी आपको इस तरह की परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
इस तरह का होना शरीर मे पोषक तत्वों की कमीं होनें का संकेत है. इसलिए अपने खाने में इस तरह की चीजों का समावेश करना चाहिए जिससे पोषक तत्वों की कमीं पूही हो सके। इसके लिए नियमित खाने में मैग्नीशियम से भरपूर सब्जियों और फलों का सेवन करना चाहिए!
