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इंसान की तरह अपने बच्चे दुलारते इन जानवरों के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, जानिए

मातृत्व भाव महिलाओं का गहना माना जाता है। मां चाहे इंसान की हो या किसी अन्य जीव की, प्राकृतिक रूप से हर मां अपने बच्चे से मुहब्बत करती है और उसके लालन-पालन में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ती है। आज हम आपको बता रहे हैं दुनिया के कुछ अनोखे जानवरों और उनके मातृत्व के बारे में कुछ अहम जानकारियां। यकीनन आपके लिए ये जानकारियां नई होंगी और आपको ये बेहद पसंद आएंगी।

इंसान की तरह अपने बच्चे दुलारते इन जानवरों के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, जानिए
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अधिकतर बरसात के मौसम के आखिरि दिनों में मादा हाथी के बच्चा पैदा होता है। जन्म के समय हाथी के बच्चे का वज़न नब्बे किलो तक होता है। एक मादा हाथी का गर्भकाल 22 महीनों तक होता है। पैदा होने के कुछ सालों तक बच्चा मां के साथ ही रहता है। इस दौरान हाथी समूह की दूसरी मादाएं भी उसकी देखभाल करती हैं। अगर बच्चा नर है तो उसे 14-15 सालों के बाद झुंड से निकाल दिया जाता है। मादा है तो वो हमेशा झुंड में रह सकती है।

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मादा ऊंट एक दफा में एक ही बच्चे को जन्म देती है। जन्म के एक साल बाद तक ऊंट का बच्चा अपनी मां का ही दूध पीता है। आमतौर पर ऊंट का बच्चा एक या दो सालों बाद मां से अलग होकर अपनी ज़िंदगी खुद गुज़ारता है और इधर मादा दूसरे बच्चे को जन्म देने की तैयारी कर रही होती है।

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शेर झुंड में रहते हैं और मादा शेरनियां एक बार में दो से तीन बच्चों को जन्म देती है। जन्म के 3 सालों तक शेरनी ही अपने बच्चों का खयाल रखती है। शेरनी अपने बच्चे को इस दौरान शिकार करने के गुर भी सिखाती है। नन्हे शेरों को सबसे अधिक खतरा बड़े शेरों से होता है। अक्सर आवारा घूम रहे शेर दूसरे शेरों के बच्चों को बेदर्दी से मार डालते हैं। अपने बच्चों की हिफाज़त करते हुए कई दफा शेरनी की जान भी चली जाती है।

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एक मादा भालू एक बार में दो बच्चों को ही जन्म देती है। कभी-कभार कुछ मादा भालू तीन बच्चों को भी जन्म देती हैं। भालू के बच्चे जन्म के 5 सालों तक अपनी मां के साथ ही रहते हैं। मां से ही ये बच्चे शिकार ढूंढना और करना सीखते हैं। बड़ी बात ये है कि अधिकतर भालू बच्चों को पूर्ण विकसित नर भालू मार डालते हैं।

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पहले तो आपको इस जानवर का नाम बता दें। इसे कोआला कहते हैं और ये जानवर सिर्फ और सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में ही पाया जाता है। कंगारू की ही तरह इस जानवर की मादाओं के पास भी एक थैली होती है। मादा कोआला अपने बच्चे को कंगारू की ही तरह अपनी थैली में छह महीनों तक रखती हैं। नन्हा कोआला जन्म के समय मात्र दो सेमी तक ही होता है। इसका वज़न भी महज़ आधा ग्राम होता है। छह महीने थैली में रहने के बाद बेबी कोआला छह महीने तक मां की पीठ पर रहता है।

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आपने अक्सर गोरिल्ला का नाम सुना ही होगा। आपने इन्हें कई दफा अखबारों में और टीवी में देखा होगा। लेकिन आपको ये मालूम नहीं होगा कि गोरिल्ला मां भी इंसानों की तरह 9 माह तक अपने बच्चे को अपने पेट में रखती है। ये एक दफा में एक ही बच्चे को जन्म देती है और 5 महीने तक उसे अपनी छाती से चिपकाए रहती है। पैदा होने के तीन सालों बाद तक गोरिल्ला बच्चा अपनी मां के साथ ही रहता है।

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कोई भी मादा कंगारू 21 से 38 महीनों तक गर्भावस्था में रहती है। मादा कंगारू एक दफा में चार बच्चों तक जन्म दे सकती है। कंगारू मां अपने बच्चों को अपनी थैलियों में रख सकती हैं। नवजात कंगारू को जॉय कहा जाता है। एक जॉय अपनी मां की थैली में 450 दिनों तक रह सकता है। इस दौरान जॉय अपनी मां की थैली में ही कई दफा मल-मूत्र भी कर देता है।

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आपको नहीं मालूम होगा कि एक मादा गेंडे के पेट में उसका बच्चा 14 से 18 महीनों तक रहता है। कोई भी गेंडा मां एक बार में एक ही बच्चे को जन्म देती है और वो भी 4-5 साल बाद अपनी मां से अलग हो जाता है। जन्म के समय गेंडों के बच्चों के मुंह पर सींग नहीं होता है। ये धीरे-धीरे उम्र के साथ आता चला जाता है।

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आपको जानकर हैरानी होगी कि अपने बच्चे पर इस कदर प्यार लुटा रही ये मां पांडा भी दरअसल इस बच्चे के दुश्मनों में से एक है। जी हां, यकीन कीजिए। हम सही कह रहे हैं। एक पांडा मां जान बूझकर तो नहीं लेकिन गलती से ज़रूर अपने बच्चे की जान ले लेती है। पांडा के बच्चों की अधिकतर समय मौत अपनी मां के नीचे दबने से होती है, ना कि किसी बीमारी से।