कबाब का नाम सुनते ही मुंह में आ जाता है पानी तो बनाए 'कबाब-ए-बहार' , जानिए तरीका
कबाब का नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। टुंडे कबाब, हरियाली कबाब, पत्थर कबाब, शामी कबाब, ऐसे न जाने कितने प्रकार के कबाब हमारे यहां पकाए जाते हैं। कबाब का दीवानापन भारत ही नहीं, दुनिया भर में है। लेकिन इनमें थोड़ा बदलाव किया जाए, तो कैसा रहे।
साकेत स्थित हिल्टन गार्डन इन में इन दिनों 'कबाब-ए-बहार' नामक कबाब फेस्टिवल चल रहा है, जहां आपको कई तरह के स्वाद मिल सकते हैं। यहां कुछ पारंपरिक कबाब हैं, तो कुछ ऐसे भी, जिन्हें थोड़ा ट्विस्ट करके नया स्वाद दिया गया है। फेस्टिवल में छह-छह तरह के शाकाहारी और मांसाहारी कबाब रखे गए हैं।
यहां पनीर और चुकंदर के कबाब का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। पनीर के कबाब का साइज बदला गया है जबकि चुकंदर के कबाब में आपको पश्चिमी रंग देखने को मिलेंगे। यहां हैदराबाद के मशहूर कबाब 'खाम खट्टाई' को भी रखा गया है। इसे हरी मूंग की दाल से बनाया जाता है। शिरिराचा सॉस के साथ चिकन टिक्का का स्वाद आप चख सकते हैं।
देसी घी में बनी देसी घी की टंगड़ी जेलेपीनो सॉस के साथ परोसी जाएगी। अनन्नास के साथ सामन फिश तंदूरी भी आपको एक अलग ही जायका देगा। शेफ कहते हैं, 'कबाब अफगान और ईरान के रास्ते से हमारे देश तक पहुंचे। वैसे मुगलों के जमाने से हमारे यहां कबाब खाए और खिलाए जा रहे हैं।
गलौटी कबाब विशेष रूप से राजा महाराजाओं के लिए बनाए जाते थे। इसी तरह तंदूरी कबाब भी हैं। दरअसल कबाब तवे और तंदूर, दोनों में बनाए जाते हैं। इस फेस्टिवल में हमने दोनों तरह के कबाब को शामिल किया है।
दरअसल हमारा मकसद है, लोगों की जुबां पर कुछ अलग तरह के स्वाद चढ़ा पाना। हम चाहते थे कि एक ही तरह के फ्लेवर से कुछ अलग हटकर स्वाद तैयार किया जाए। मैंने और मेरी टीम ने लोगों के लिए कई चीजें तैयार की हैं।यह फेस्टिवल 30 नवंबर तक चलेगा।
