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आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए करे ये...

जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर के अनुसार, हिंदुस्तान में लगभग 20 करोड़ लोगों में आयोडीन की कमी से होने वाले विकार (आईडीडी) का खतरा है.
इनके अतिरिक्त 7.1 करोड़ लोग गॉइटर (गलगंड) व अन्य आईडीडी से पीड़ित हैं. संसार भर में यह आंकड़ा 2 अरब है. आईडीडी किसी को भी अपना शिकार बना सकता है, लेकिन 6 से 12 आयु वर्ग के बच्चे-किशोर सबसे ज्यादा प्रभावित रहते हैं. आईडीडी का सबसे बुरा प्रभाव ज़िंदगी के पहले 1000 दिनों में व गर्भाधान से 2 साल की आयु तक होता है.
आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियां
यदि समय पर उपचार नहीं किया जाए, तो आयोडीन की कमी से हार्ट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं जैसे- हार्ट का बढ़ा हुआ आकार व हार्ट फेल होना. वहीं इसकी कमी से स्त्रियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या हो सकती हैं, जैसे-अवसाद व बांझपन. आयोडीन की कमी वाली स्त्रियों के प्रेग्नेंट होने की आसार 46 प्रतिशत कम होती है. गर्भवती स्त्रियों में थायराइड हार्मोन की कमी का प्रभाव बच्चे पर पड़ता है. नवजात जन्म से निर्बल होगा. वहीं गर्भपात, मृत बच्चों का जन्म व जन्म से ही होने वाली असामान्यताओं का जोखिम बढ़ जाता है.