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प्रेगनेंसी में मिट्टी खाने के कारण, प्रभाव और इलाज

प्रेगनेंसी के दौरान मुझे मिट्टी खाने की बड़ी इच्छा होती थी, मैंने काफी लोगों को इसके बारे में बताया तो लगभग सबने कहा कि ये कोई बड़ी बात नहीं है, और ये इच्छा लगभग सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को होती है। पर धीरे-धीरे मेरी ये इच्छा अजीब होने लगी, मुझे मिट्टी के साथ-साथ और भी अजीब चीजें खाने का मन करने लगा, जैसे पेंट, तारकोल, बर्फ, कागज और ना जाने क्या।

अब मुझे लगा कि कहीं ना कहीं कुछ गड़बड़ है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। मैंने तुरंत अपने पति से ये सब कहा तो हमने अगले दिन ही डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लिया। क्लिनिक पर जाकर डॉक्टर ने मुझे मेरी इस अजीब सी क्रेविंग्स के बारे में समझाया, और बताया कि मुझे पिका सिंड्रोम के आरंभिक लक्षण हैं। हालाँकि डरने की बात नहीं थी पर जल्द ध्यान ना देने पर ये मेरे और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हो सकता था।

प्रेनेंसी में मिट्टी खाने के कारण, प्रभाव और इलाज

प्रेगनेंसी में मिट्टी खाने (Pregnancy Mein Mitthi Khane) के अनेक कारण हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं –

#1. पिका सिंड्रोम

डॉक्टर के अनुसार प्रेगनेंसी में अगर मिट्टी के साथ साथ अन्य चीजें खाने की क्रेविंग्स होने का मुख्य कारण पिका सिंड्रोम हो सकता है। इस सिंड्रोम में इस तरह की चीजें खाने की इच्छा होती है जो मुख्यत खाने की चीज नहीं होती हैं और साथ ही इनमें कोई पोषक तत्व नहीं होते हैं। जैसे-
  • मिट्टी
  • हेयरबॉल्स (फर वाली बॉल या बालों का गुच्छा)
  • बर्फ
  • रंग
  • कच्चे स्टार्च (एमाइलोफैगी)
  • चारकोल
  • राख
  • कागज
  • चॉक
  • कपड़ा
  • बेबी पाउडर
  • कॉफी ग्राउंड्स
  • अंडे का छिलका
अगर आपको भी ऐसी ही कुछ विचित्र चीजें खाने की इच्छा हो रही है तो इसे बिल्कुल भी नज़र अंदाज़ ना करें वरना ये आपकी और आपके शिशु के लिए जानलेवा भी हो सकता है।

#2. एनीमिया होना या आयरन की कमी

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था में एनीमिया होना या आयरन की कमी होने के कारण महिलाओं को मिट्टी खाने की इच्छा होती है, मिट्टी में थोड़ी बहुत मात्रा में आयरन होने के कारण ये उसकी पूर्ति करती है।

#3. मॉर्निंग सिकनेस से बचाव

कई बार कुछ प्रेग्नेंट महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस में मिट्टी खाने पर अच्छा महसूस होता है तो वो इसे एक आदत बना लेती हैं और मिट्टी खाना शुरू कर देती हैं।
गर्भावस्था के दौरान मिट्टी खाने से बच्चे और माँ दोनों पर ही बुरा असर पड़ता है , और समय पर इसका इलाज बहुत जरुरी है।