कोरोनावायरस की वैक्सीन / सच में कब आएगी कोरोनावायरस की वैक्सीन आखिर और कितना करना होगा इंतजार

भारत में ज्यादा टेस्ट की वजह से कोरोनावायरस के संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है लेकिन इसी के साथ देश अब सामान्य होने लगा है इसीलिए आप सभी घरों से बाहर निकलने लग गए हैं आप यह सोच रहे होंगे कि आप तब ही बचेंगे जब कोरोनावायरस की वैक्सीन मिलेगी लेकिन अब आप यह देखिए कि आप किन-किन महामारीओं से बिना वैक्सीन के लड़ चुके हैं और वैक्सीन ना होते हुए भी कौन से हमारे पास पांच वैक्सीन है
कोरोनावायरस को काबू में करने के लिए हमारे पास दो ठोस तरीके हैं पहला है वैक्सीन जिसका आने में और कितना वक्त लग सकता है या किसी को नहीं पता
और दूसरा है ज्यादा से ज्यादा जांच क्योंकि जितनी ज्यादा जांच होगी उतने ही मरीजों का पता चलेगा और वायरस को रोकने में सफलता मिलेगी लेकिन यहां पर सोचने वाली यह बात है कि कई मुल्क कोरोनावायरस वैक्सिंग बनाने का दावा कर चुके हैं लेकिन इस को बाजार में लाने में देरी क्यों हम आपको पूरा सच समझाते हैं .
और दूसरा है ज्यादा से ज्यादा जांच क्योंकि जितनी ज्यादा जांच होगी उतने ही मरीजों का पता चलेगा और वायरस को रोकने में सफलता मिलेगी लेकिन यहां पर सोचने वाली यह बात है कि कई मुल्क कोरोनावायरस वैक्सिंग बनाने का दावा कर चुके हैं लेकिन इस को बाजार में लाने में देरी क्यों हम आपको पूरा सच समझाते हैं .
आमतौर पर किसी वैक्सीन को बनने में और उसे डिवेलप करने और बाजार तक पहुंचाने में कम से कम 10 से 15 साल लग जाते हैं मगर कोरोनावायरस ने दुनियाभर के रिसर्चर को एक जगह पर लाकर खड़ा कर दिया है इसीलिए दावा किया जा रहा है कि साल डेढ़ साल के अंदर कोरोना वायरस की वैक्सीन बन जाएगी अब आपको यह जानना जरूरी है कि जिन जिन बीमारियों का टीका बना है उनमें कितना वक्त लगा .
सबसे पहले हम बात करते हैं चेचक बीमारी की तो चेचक का टीका बनने में 28 साल लगे, कैंसर का टीका बनने में 15 साल लगे, डायरिया का टीका बनने में 15 साल लगा, बच्चों की कई बीमारियों के लिए 11 साल लगे, इसमें जिन बीमारियों का टीका नहीं मिला है वह एचआईवी का और जीका वायरस का टीका अभी तक नहीं बना, इसके साथ ही इबोला वायरस का टीका भी अभी तक नहीं मिला है .
सबसे पहले हम बात करते हैं चेचक बीमारी की तो चेचक का टीका बनने में 28 साल लगे, कैंसर का टीका बनने में 15 साल लगे, डायरिया का टीका बनने में 15 साल लगा, बच्चों की कई बीमारियों के लिए 11 साल लगे, इसमें जिन बीमारियों का टीका नहीं मिला है वह एचआईवी का और जीका वायरस का टीका अभी तक नहीं बना, इसके साथ ही इबोला वायरस का टीका भी अभी तक नहीं मिला है .
अब सवाल यह है कि किसी वैक्सीन को बनने में इतना लंबा समय क्यों लगता है इसे आप कोरोनावायरस की वैक्सीन की तैयारी से ही समझिए सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार कोई भी वैक्सीन स्टेज में तैयार होती है पहले स्टेज में वायरस को समझा जाता है और दूसरे स्टेज में प्रीक्लिनिकल यानी जानवरों पर टेस्टिंग की जाती है तीसरा स्टेज बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी स्टेज में पता चलता है कि वैक्सीन कितनी असरदार है और कितनी नहीं तीसरे स्टेज के 3 भाग होते हैं पहले भाग में छोटे ग्रुप पर ट्रायल होता है दूसरे पार्ट में ज्यादा लोगों को उम्र और सेहत के हिसाब से दी जाती है अभी इस स्टेज पर अमेरिका बीजिंग हांगकांग की कंपनी इस स्टेज पर है तीसरे भाग में हजारों लोगों पर टेस्टिंग का बड़ा ट्रायल किया जाता है और वैक्सीन का प्रभाव देखा जाता है कुछ वैक्सीन चौथे भाग से भी गुजरती है जहां वैक्सीन पास होने के बाद भी उस पर गहन अध्ययन किया जाता है वैक्सीन बनाने के चौथे स्टेज में रेगुलेटरी अप्रूवल होता है और पांचवे स्टेज से मैन्युफैक्चरिंग यानी उत्पादन होने लग जाता है और स्टेज सिक्स में टीके को क्वालिटी कंट्रोल से गुजरना होता है यह सब स्टेज पूरे होने के बाद वैक्सीन को बाजार में उतार दिया जाता है और इन्हीं प्रक्रिया में लंबा वक्त लग जाता है और कोरोना वायरस के टिके में भी ऐसा ही हो सकता है .
इसीलिए हम सबको फार्मा कंपनी की वैक्सीन की जरूरत नहीं है बल्कि 5 मानसिक वैक्सीन की जरूरत है .
1. व्यायाम करें .
2 . भीड़ में ना जाए
३. घर और ऑफिस में सोशल डिस्टेंसिंग रखें
4. साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें
5 . घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहने और किसी को छूने से बचें
1. व्यायाम करें .
2 . भीड़ में ना जाए
३. घर और ऑफिस में सोशल डिस्टेंसिंग रखें
4. साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें
5 . घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहने और किसी को छूने से बचें
फिलहाल कोरोनावायरस की कोई पुख्ता वैक्सीन नहीं है अभी वह कहते हैं ना सावधानी हटी दुर्घटना घटी वाली स्थिति है हमने जो आपको पांच वैक्सीन बताई है वही ही आप को कोरोनावायरस से बचा सकती
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