ह्यूमन ट्रायल का पहला पड़ाव पार, कोरोना वैक्सीन के करीब ऑक्सफोर्ड

कोरोना वायरस की वैक्सीन के आविष्कार में 100 से भी ज्यादा कैंडिडेट्स जुटे हुए हैं. लेकिन एक सफल वैक्सीन को लेकर सबसे ज्यादा उम्मीदें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने ही जगाई हैं. प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट के नेतृत्व में किए जा रहे इस वैक्सीन ट्रायल में शुक्रवार को बड़ी कामयाबी मिली. आपको जानकर खुशी होगी कि ह्यूमन ट्रायल का पहला चरण सफलतापूर्वक पार कर लिया है और अब जल्द ही दूसरे और तीसरे पड़ाव की शुरुआत होने जा रही है. इस वैक्सीन का नाम ChAdOx1 nCoV-19 है.
वैक्सीनोलॉजी की प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट ने बताया कि उन्होंने ह्यूमन ट्रायल के पहले चरण में 18 से 55 साल की उम्र के 1,000 वॉलिन्टियर्स को शामिल किया था. इन सभी लोगों को दो समूहों में बांटने के बाद दो अलग-अलग वैक्सीन को टेस्ट किया गया. हालांकि, वॉलिन्टियर्स को इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी कि उन्हें कौन सी वैक्सीन दी गई है.
वैक्सीन ट्रायल का दूसरा स्टेज
अब वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण की तैयारी की जा रही है. इसके पहले चरण में कम संख्या में 5 से 12 साल के बच्चे, युवा और 56 से 69 साल के 10,260 लोगों को शामिल किया जाएगा. इस तरह शोधकर्ता अलग-अलग उम्र के लोगों में वैक्सीन के असर का आकलन करेंगे.
अब वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण की तैयारी की जा रही है. इसके पहले चरण में कम संख्या में 5 से 12 साल के बच्चे, युवा और 56 से 69 साल के 10,260 लोगों को शामिल किया जाएगा. इस तरह शोधकर्ता अलग-अलग उम्र के लोगों में वैक्सीन के असर का आकलन करेंगे.
वैक्सीन ट्रायल का तीसरा स्टेज
इंसानों पर होने वाले वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण में 18 साल के ज्यादा उम्र के लोगों को और भी बड़ी संख्या में शामिल किया जाएगा. इसमें शोधकर्ता देखेंगे कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए यह वैक्सीन कितनी असरदार है.
इंसानों पर होने वाले वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण में 18 साल के ज्यादा उम्र के लोगों को और भी बड़ी संख्या में शामिल किया जाएगा. इसमें शोधकर्ता देखेंगे कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए यह वैक्सीन कितनी असरदार है.
वैक्सीन ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण में ग्रुप के सभी वॉलिन्टियर्स को ChAdOx1 nCoV-19 और लाइसेंस्ड वैक्सीन MenACWY के एक या दो डोज़ दिए जाएंगे. ये परीक्षण एक 'ब्लाइंड गेम' की तरह होगा जिसमें वॉलिन्टियर्स को ये नहीं बताया जाएगा कि उन्हें कौन सा वैक्सीन दिया गया है.
Photo: Twitter
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इससे पहले भी सारा गिल्बर्ट ने कहा था कि उन्हें इस ट्रायल से व्यक्तिगत तौर पर काफी उम्मीदें हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि अगर वैक्सीन ट्रायल्स में उन्हें सफलता मिली तो सितंबर के महीने तक दुनिया को कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन मिल सकती है.
ऑक्सफोर्ड ने कैसे बनाया कोरोना वैक्सीन?
वैक्सीन बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने सबसे पहले कोरोना वायरस के सरफेस से जीन्स का स्पाइक प्रोटीन लिया और उससे तैयार वैक्सीन को संबंधित व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट किया.
वैक्सीन बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने सबसे पहले कोरोना वायरस के सरफेस से जीन्स का स्पाइक प्रोटीन लिया और उससे तैयार वैक्सीन को संबंधित व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट किया.
यह वैक्सीन शरीर में एंटीबॉडीज को प्रोड्यूस करने के बाद इम्यून सिस्टम को उत्तेजित करेगा और शरीर में टी-सेल्स को भी एक्टिवेट करेगी, जो इन्फेक्टेड सेल्स को नष्ट करने का काम करेंगे.
रिसर्च एक्सपर्ट्स का ये भी दावा है कि अगर कोरोना वायरस शरीर पर दोबारा भी अटैक करेगा तो भी ये एंटीबॉडीज और टी-सेल्स उससे लड़कर शरीर का बचाव करेंगे.
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