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बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर हो रही बहस के बीच आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान ने कहा- 'एक दिन उनके भी बच्चे होंगे?'



 बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की इस तरह मौत से फिल्म इंडस्ट्री और उनके फैंस शौक में हैं। अभिनेता ने मुंबई बांद्रा अपने घर में 14 जून को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुशांत की मौत के बाद लोगों ने फिर से नेपोटिज्म का मुद्दा उठा दिया है और सेलेब्स जैसे करण जौहर, आलिया भट्ट, सोनम कपूर आदि इनपर आरोप लगाया जा रहा की उन्होंने इंडस्ट्री में सुशांत सिंह राजपूत को आउटसाइडर महसूस कराया।

अब आलिया की मां सोनी राजदान ने चल रही भाई-भतीजावाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आज जो लोग इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं क्या वह अपने बच्चों को समर्थन नहीं करेंगे अगर वो इस इंडस्ट्री में अपना करियर बनाना चाहएंगे। निर्देशक हंसल मेहता के ट्वीट से यह पूरी चर्चा शुरू हुई।

फिल्म मेकर हंसल मेहता ने हाल ही में ट्वीट करके कहा, नेपोटिज्म की बहस को और बड़ा होना चाहिए। मेरे बेटे को मेरी वजह से दरवाजे के भीतर कदम रखने दिया और क्यों नहीं, लेकिन वो सर्वश्रेष्ठ काम का अहम हिस्सा रहा, क्योंकि वो टैलेंटेड है, अनुशासन में रहता है, मेहनती है और उसमें भी मेरे जैसे गुण हैं। सिर्फ इसलिए नहीं कि वो मेरा बेटा है।
इसके बाद हंसल मेहता ने एक और ट्वीट करते हुए कहा, वह फ़िल्में बनाएंगे इसलिए नहीं क्योंकि मैं उन्हें प्रोड्यूस करूंगा। मैं नहीं कर सकता। लेकिन क्योंकि वह उसे बनाना चाहते हैं। उसका करियर तभी बनेगा जब वे जीवित रहेंगे। यह आखिरकार उसके लिए है। उसका करियर उसे खुद बनाना है, पिता को नहीं। मेरी छाया उसके लिए सबसे बड़ा फायदा और सबसे बड़ी चुनौती दोनों है।
हंसल मेहता के ट्वीट पर आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान ने रिप्लाई करते हुए लिखा, आप किसके बेटे या बेटी हैं, इसकी वजह से लोगों की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ जाती हैं। जो लोग नेपोटिज्म को लेकर हल्ला मचा रहे हैं, वही खुद अपने बच्चों को सपोर्ट करेंगे, अगर वो इंडस्ट्री में आना चाहेंगे तो। क्या होगा, अगर वो खुद इंडस्ट्री ज्वॉइन करना चाहेंगे तो? क्या वो उन्हें ऐसा करने से रोक देंगे?
सोनी राजदान के ट्वीट को हंसल मेहता ने शेयर करते हुए लिखा, कुछ लोगों को निशाना बनाते हुए बहस को छोटा कर दिया गया है। भाई-भतीजावाद खत्म होने से पहले हमें पाखंड और निहित स्वार्थ प्रचार को कम करने की दिशा में काम करना चाहिए। बुली करना बंद होना चाहिए।'